तुम्हारे चेहरे का कुछ भी यहाँ नहीं मिलता

posted Feb 6, 2011, 5:49 PM by Abhishek Ojha   [ updated Nov 10, 2011, 8:32 PM ]

खड़ा हूँ कब से मैं चेहरों के एक जंगल में, तुम्हारे चेहरे का कुछ भी यहाँ नहीं मिलता ।   - कैफ़ी आजमी
Comments