परसाई को पढते हुए...

posted May 2, 2011, 6:26 PM by Abhishek Ojha   [ updated Nov 10, 2011, 8:22 PM ]
 
... कमबख्त गणित में उलझी थी. गणितवाली से प्रेम कैसे हो सकता है? बाद में उसने गणित में डाक्टरेट कर ली. पर मैं यदि शादी कर लेता तो वह बिस्तर में 'वेरियेबल्स' पर बहस करती. .... तो यार परसाई, एक तो गणित में समीकरण के कारण गयी और दूसरी का मंगेतर था. तीसरी, जिससे मुझे उम्मीद थी - उसने मुझे दावत दी. मैं गया. पर वहाँ उसके पति और दो बच्चे थे.  - हरिशंकर परसाई. ('बचाव पक्ष का बचपन' में )
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