विदेश में कमरे

posted Jan 28, 2011, 2:20 PM by Abhishek Ojha   [ updated Oct 28, 2013, 11:22 AM ]

I copied and saved this awesome poem by Agyeya few weeks back.  Simple ...but so true.  Loved this one... while leaving an apartment for the last time... sometimes, I also go back just to check it for the last time :)

वहाँ विदेशों में
कई बार कई कमरे मैंने छोड़े हैं
जिन में छोड़ते समय
लौटकर देखा है
कि सब कुछ

ज्यों का त्यों है न ?
यानि
कि कहीं कोई छाप
बची तो नहीं रह गई
जो मेरी है
जिसे कि अगला कमरेदार
ग़ैर समझे …
                      - अज्ञेय

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