जीवन

posted Dec 17, 2016, 12:44 PM by Abhishek Ojha   [ updated Dec 17, 2016, 12:49 PM ]

अगर हमारे आस पास कुछ सबसे खूबसूरत है जिसे हम देख कर भी नहीं देखते वो है - जीवन ! रहस्यमयी रूप से अतिशय खूबसूरत। 

अजीब है कि हम दूसरे ग्रहों, गैलक्सी पर जीवन होगा या नहीं, होगा तो कैसा होगा वगैरह सोचते रहते है. और तब भी सिर्फ यही सोचते हैं कि वो हमसे ज्यादा विकसित होंगे या नहीं। उनके दो पैर, दो आँखें होंगी या नहीं। हम ये शायद ही कभी सोचते हैं कि धरती पर ही जीवन इंसानों से बहुत आगे, बहुत विविध और खूबसूरत है. हम कभी सोचते हैं कि पौधे ,जानवर,धरती पर, समुद्र में जो जीवन है... वो भी चतुर और समझदार जीवन है? माइक्रोऑर्गेनिज्म छोड़ दें तो भी कितने जीव, कितनी विविधता - अद्भुत सहयोग और संतुलन। जैसे हम अपने अंदर देखने की वजाय बाहर देखते हैं वैसा ही कुछ है. अपने महासागरों के अंदर कितना जीवन है उससे ज्यादा हम सौरमंडल के अन्य ग्रहों के बारे में जानते हैं. दार्शनिक होने जैसी बात नहीं है - बहुत साधारण सी बात है. इतनी सी बात है. इतनी सी की हमें दिखती ही नहीं। नजर घुमा के हम देखते ही नहीं। हाल में मैंने दो चीजें देखी - अंडर वाटर दुनिया और  रेन फारेस्ट। और फिर... पहले तो आई कैंट गेट एनफ ऑफ़ इट  फिर आई कैंट गेट ओवर इट जैसी बात हुई. मुझे नहीं लगता मैंने इससे ज्यादा खूबसूरत कुछ देखा है. वैसे कुछ दिनों में ये खुमारी भी उतर ही जानी है. पर कुछ बातें ऐसा नशा होती है जिसे हम उतरने देना नहीं चाहते। वो लम्हें जिनमें हमें लगता है... मानो संसार, ब्रह्माण्ड, जीवन का ज्ञान क्या होता है उसका एक फ्लैश सा दिख गया हो और समझ न आया हो क्या था. समझने की कोशिश में और गायब हो गया हो. विरोधाभास के बीच तारतम्य की एक झलक दिख गयी हो. हम फिर से वो देख लेना चाहते हो, फिर से वो लम्हा जी लेना चाहते हो - उसका हैंगओवर बचा रह गया हो - वैसा कुछ. 

एक सूर्य से चलता जीवन क्रम। एक जीवन के भीतर कई जीवन - एक वृक्ष के अंदर पूरा संसार। वृक्ष की जड़ में ही एक पूरा संसार। एक कोरल रीफ और उसके आस पास ही पूरा संसार - विशाल संसार - खूबसूरत - महीन संतुलन - भंगुर संतुलन - अद्भुत। एक अलग ही संसार पर बिल्कुल वैसा ही संसार ! हर संसार का अलग नियम पर सब एक ही नियम से चलते हुए जैसा कुछ.  रंग-बिरंगे-नाचते-गाते-उड़ते-तैरते-चलते-जीते-मरते-मिटते-प्रेम करते-बुद्धिमता-अनगिनत जीव-जीवन क्रम। पूरी सृष्टि मानो समरूपता और एक महीन संतुलन के अलावा कुछ नहीं। कुछ अजब सा एहसास। अजीब सा ज्ञान। अजीब सी अनुभूति- जीवन भंगुर है - नगण्य - इन्सिग्नीफिकेंट - पर खूबसूरत है - बहुत खूबसूरत।



 
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